ज़िंदगी का सफर - 💞हमसफ़र के साथ💞 "भाग 1"
एक घर के अंदर चारो तरफ तरह तरह की सजावट की हुई थी, उस घर को दुल्हन की तरह सजाया गया था, घर के बाहर घोड़े की लगाम अपने हाथ में लिए हुए एक आदमी उस घोड़े को एक जगह बांधकर उस जगह चला गया जहा कुछ लोग खाना खाने में व्यस्त थे, कुछ बैंड वाले आदमी भी अपने अपने बैंड को एक जगह रखकर खाना खाने चले गये, बाहर से ऐसा लग रहा था जैसे अभी अभी किसी की बारात उस घर घर द्वार तक आई हो, वही पास में एक खूबसूरती से सजी हुई कार खड़ी थी जिसपर दूल्हा और दुल्हन का नाम फूलो का दिल बनाकर उसके बीचो बीच " इवान वेड्स किआरा " लिखा हुआ था
वही घर के अंदर मेहमानो का जमाबड़ा लगा हुआ था, सभी आपस में बाते करते हुए मड़प में देख रहे थे जहा दूल्हा बना इवान बैठा हुआ था
वही मेहमानों के बीच दो औरते बैठी आपस में बाते कर रही थी
पहली औरत ( दूसरी औरत से ) :- आपको पता है सरिता बहन मैने सुना है की इस लड़के की ये दूसरी शादी है, और इसके दो बच्चे भी है
सरिता ( पहली औरत से ) :- हा ममता बहन मैने भी सुना है थी जिस लड़की से इसकी शादी हो रही है, उसकी शादी पहले एक बार टूट चुकी है, शादी के मंडप पर दूल्हा उसे छोड़कर बारात वापस लेकर चला गया था
ममता :- क्या सच मे बहन, लेकिन ऐसा क्या हुआ जो उसकी शादी टूट गई
सरिता :- सुना है वो लड़की बाँझ है ।
ममता :- अच्छा तभी उस लड़की के घरवाले उसकी शादी दो बच्चे के बाप से करवा रहे है, सही है बहन कोई अपने कुंवारे बेटे के माथे इस बाँझ को क्यू बंधेगा
सरिता :- हा सही कहा बहन
ममता :- जाने दे बहन हम तो यहा शादी देखने आये है हमे दुसरो से क्या उनकी ज़िंदगी वो जाने
सरिता :- सही कहा बहन हमे इनसे क्या लेना देना, चलो वहा चलते है वहा देखो तरह तरह के पकवान रखे हुए है, चलो चलकर खाते है
ममता :- हा बहन चलो भूख तो बहुत जोरो की लगी है, चलो खाना खाकर फिर आइसक्रीम भी खाएंगे
सरिता :- हा चलो चलो जल्दी
वो दोनो ओरते दूसरी तरफ चली गई जहा भोजन बगैरह की व्यवस्था थी
इवान शेरवानी पहने हुए दूल्हा बना हुआ था
वही मंडप में बैठा हुआ इवान अपने सामने जलते हुए हवन कुंड को देखते हुए अपने मन में बोलता है
इवान :- आय एम सॉरी किआरा, मैं ये शादी सिर्फ अपने बच्चों के लिए कर रहा हुं, ताकि उन्हे एक माँ का प्यार मिल सके, मैं शायद ही तुम्हे अपना पाउ क्युकी मैं अपनी अनु को कभी नही भूल सकता, मै उससे बहुत प्यार करता हु, भले ही वो मेरी ज़िंदगी में ना हो पर मेरी यादो में हमेशा रहेगी, अगर मेरी मजबूरी ना होती तो मै कभी तुमसे शादी करने के लिए राजी ना होता, हो सके तो मुझे माफ़ कर देना, मै अपने स्वार्थ के लिए तुम्हारी ज़िंदगी को इस मोड़ पर ला रहा हु जहा तुम्हे सभी का प्यार मिलेगा पर पति का नहीं ।
वही दूसरी तरफ किआरा दुल्हन का लिवाज पहने अपनी सहेलियों के साथ मंडप तक चलते हुए मन में सोच रही थी
किआरा :- दुल्हन तो मैं एक बार पहले भी बनी थी, और आज फिर बनी हुई हु, इसी तरह अपनी सहेलियों के साथ मंडप तक तो गई थी और इसबार भी जा रही हुं, बस फर्क इतना है तब मंडप तक पहुंचने पर मेरी ज़िंदगी में तूफान आया था और वो शादी होने से पहले ही टूट गई , लेकिन आज यहा ये शादी भी पुरी होने वाली है लेकिन बिन मन के, क्युकी मैं ये शादी बस अपने पापा की खुशी के लिए कर रही हुं, ताकि उन्हे दुनिया बालो के ताने ना सुनने पड़े की एक बाँझ लड़की को घर में बैठा रखा है, ओर उन बच्चों के लिए भी कर रही हु जिनसे सिर्फ कुछ मुलाकातों मे ही वो दोनो मेरी ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन चुके है, जिन्होंने मेरी बाँझ ज़िंदगी मे ममता के रंग भर दिये, मुझे माँ कहलाने का हक दिया, जानती हु इवान जी की अपने पहली मुलाक़ात मे ही मुझे बता दिया था जब आप मुझे देखने आये थे की आप आपकी पहली वाइफ अनु जी को कभी नहीं भुला पाएंगे, और ना ही मुझे पत्नी होने का हक देंगे, पर मै फिर भी खुश हु क्युकी मुझे दो नन्हे नन्हे बच्चों को माँ बनने का अधिकार जो मिलेगा, मै उसी मै बहुत खुश हु ।
किआरा मंडप तक पहुंच जाती है और दूल्हे बने इवान के बगल में बैठ जाती है, इवान एक नजर किआरा की तरफ देखता है फिर वापस सामने देखने लगता है पंडित जी मंत्र पढ़ना शुरु करते है और जैसे जैसे वो बोलते वैसे वैसे इवान और किआरा करते जाते है, वरमाला और फेरो के बाद इवान किआरा की मांग में सिंदूर भरकर उसे मंगलसूत्र पहना देता है और उसे अपना हमसफ़र बना लेता है ।
और पंडित जी बोल पढ़ते है
पंडित जी :- शादी सम्पन्न हुई यजमान आज से आप दोनो पति पत्नी है, अब आप दोनो अपने सभी बड़ो का आशीर्बाद ले लीजिये
इवान और किआरा दोनो उठकर अपने सभी बड़ो के पैर छूकर आशीर्वाद लेते है, वो दोनो जैसे ही सुमित्रा जी के पास आते है किआरा उनके पास वन्या और उत्कर्ष ( इवान के बच्चे जो अभी तीन महीने के है ) को देख मुस्कुरा देती है तो सुमित्रा जी किआरा की गोद मे वन्या और उत्कर्ष को दे देती है और दोनो के माथे पर प्यार से किस करती है, इवान किआरा को अपने बच्चों को इतना प्यार करते देख मुस्कुरा देता है।
सुमित्रा जी मुस्कुरा देती है, फिर किआरा की छोटी बहन तन्वी उसे अपने साथ आराम करने के लिए रूम मे ले जाती है, किआरा दोनो बच्चों को बेड पर आराम से सुलाती है तभी उसे बाहर से आवाज सुनाई देती है जो उसकी सौतेली माँ गौरी जी की और उसके पापा दिलीप जी की आवाज होती है, गौरी जी दिलीप जी से कहती है
गौरी जी :- ये आप क्या कर रहे है आप उस लड़की के लिए ये सारे गहने दे रहे है आपने एक बार भी तन्वी के बारे मे नहीं सोचा, कल को उसकी भी शादी होगी तब क्या करेंगे आप
दिलीप जी ( थोड़े गुस्से से ) :- ये आप क्या कह रही है गौरी, मै जानता हू की आप किआरा को पसंद नहीं करती, ना ही उसे अपना मानती है, इसका मतलब ये नहीं की वो मेरी कुछ नहीं है वो मेरी बेटी है और मै अपनी बेटी के लिए सब कुछ करूंगा और आप मुझे रोक नहीं सकती, और ये सारे गहने किआरा की माँ के है तो आप अब कुछ ना बोले वही बेहतर है, और रही बात तन्वी की तो उसके लिए भी मैने गहने तैयार किये है, सिर्फ उसकी शादी के लिए ही नहीं मैने हमारे बेटे दर्श की बहु के लिए भी किये है तो आप अब कुछ ना कहिये जाइये जाकर एक अच्छी माँ की तरह किआरा की बिदाई की तैयारी कीजियेगौरी जी दिलीप जी की बात सुनकर गुस्से मे चली जाती है और दिलीप जी एक गहरी सांस लेते है फिर मुस्कुराकर किआरा के रूम मे आते है तो किआरा जल्दी से अपने आशुओ को संभालती है और बच्चों के पास बैठ जाती है दिलीप जी किआरा के सर पर हाथ फेरते है और किआरा को सारे गहने देकर वन्या और उत्कर्ष की तरफ देखते हुए उससे बोलते है
दिलीप जी :- बेटा ये तुम्हारी माँ के गहने है आज से ये तुम्हारे हुए, इन्हे संभाल कर रखना, और एक जरूरी बात किआरा बेटा तुम्हारे पास अब एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी आई है वन्या और उत्कर्ष की, कभी दोनो बच्चों को माँ के प्यार की कमी मत होने देना, क्युकी तुम अच्छी तरह जानती हो की माँ के बिना बच्चों की ज़िंदगी केसी होती है, मुझे कभी निराश ना करना ।
किआरा हाँ मे सिर हिला देती है और बोलती है
किआरा :- पापा मै आपसे प्रॉमिस करती हु मै वन्या और उत्कर्ष का ख्याल खुद से भी ज्यादा रखूंगी, उन्हे कभी माँ के प्यार की कमी नहीं होने दूंगी और ना ही ये एहसास होने दूंगी की मै उन दोनो की जन्म देने वाली माँ नहीं, मै बहुत अच्छे से जानती हू की एक माँ की अहमियत बच्चों की ज़िंदगी मे क्या होती है और मै हमेशा कोशिश करूंगी की उन दोनो के दिल मे कभी ये ख्याल गलती से भी ना आये की मैने उनके साथ अन्याय किया है कभी उनसे सौतेलपन का व्यवहार किया है, मै हमेशा आपकी बातो का ध्यान रखूंगी
दिलीप जी मुस्कुराकर किआरा को गले लगा लेते है फिर बोलते है
दिलीप जी :- बेटा सबके साथ साथ अपना भी ख्याल रखना मै तुम्हे खुश देखना चाहता हु ओके
किआरा ने हाँ मे सिर हिलाया, दिलीप जी कुछ और बाते किआरा को समझाकर उसकी बिदाई करवाते है ।
किआरा नम आँखों से अपनी माँ के गहने देखती है और उन्हे सीने से लगा रोने लगती है, कुछ देर बाद खुद को संभाल कर गहने रख देती है और बच्चों के पास वापस बैठ जाती है ।
कुछ देर बाद किआरा की बिदाई हो जाती है और इवान किआरा को अपने साथ अपने घर ले आता है एक नये सफर की शुरुआत करने किआरा को अपना हमसफ़र बनाकर ।
To be continued.......................
Arti khamborkar
19-Dec-2024 04:04 PM
v nice
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HARSHADA GOSAVI
03-Jul-2023 03:08 PM
awesome
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RISHITA
30-Jun-2023 12:50 PM
good
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